भारत में सोना ग्राम के हिसाब से बिकता है, और इसका भाव हर दिन दुनिया भर के दाम और रुपये के साथ बदलता रहता है। 1 अक्टूबर 2026 तक भारत में 24 कैरेट सोने का भाव करीब 1,49,580 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट का करीब 1,37,110 रुपये प्रति 10 ग्राम है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोना करीब 4,180 डॉलर प्रति औंस पर टिका है, भले ही ब्रेंट कच्चा तेल फिर $102 के क़रीब पहुँच गया हो।
इस बार हलचल तेल से कम, ब्याज दर से ज़्यादा जुड़ी है। ब्रेंट कच्चा तेल 1 अक्टूबर को तीसरे अमेरिकी विमानवाहक पोत की ख़बर पर 4.4 प्रतिशत उछलकर $102.31 पर पहुँचा, जो आमतौर पर सोने में डर का प्रीमियम जोड़ता, लेकिन अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व की ऊँची ब्याज दर ने डॉलर में सोने का भाव करीब वहीं रोक दिया, और भारत में भी भाव में गिरावट, बढ़त नहीं, आगे बढ़ी।
खरीदारों के लिए सिर्फ़ यही भाव पूरी कहानी नहीं है। इसके ऊपर जीएसटी और मेकिंग चार्ज अलग से जुड़ते हैं, इसलिए गहने का असली बिल हमेशा बताए गए भाव से ज़्यादा होता है।
कैरेट के हिसाब से सोने का भाव
आप कितना भुगतान करते हैं, यह शुद्धता पर निर्भर करता है। नीचे 1 अक्टूबर 2026 को तीनों आम कैरेट के भाव की तुलना दी गई है।

22 कैरेट का भाव 24 कैरेट से करीब 8 से 9 प्रतिशत कम रहता है, जबकि 18 कैरेट, जो हल्के और नग जड़े गहनों में आता है, शुद्ध सोने से प्रति ग्राम करीब एक-चौथाई सस्ता पड़ता है।
भाव ऊपर-नीचे क्यों होता है
भारत में सोने का भाव तीन बड़ी बातों से तय होता है। सबसे बड़ा कारण है दुनिया भर में सोने का दाम, जो डॉलर में और प्रति औंस में तय होता है, और यह 1 अक्टूबर 2026 को करीब 4,180 डॉलर प्रति औंस पर है, जो जनवरी 2026 के करीब 5,602 डॉलर के रिकॉर्ड से लगभग 25 प्रतिशत नीचे है। जब दुनिया में दाम चढ़ता है, तो भारत में भी भाव एक दिन के अंदर ऊपर आ जाता है।
दूसरा कारण रुपया है। रुपया 1 अक्टूबर 2026 को तेल उछलने के साथ करीब 96.3 प्रति डॉलर तक कमज़ोर हुआ, और आमतौर पर कमज़ोर रुपया डॉलर में गिरते सोने को रुपये में सहारा देता है, हालाँकि इस बार यह अंतरराष्ट्रीय भाव की छोटी-सी गिरावट को पूरी तरह पाटने के लिए काफ़ी नहीं था।
तीसरा कारण है आयात कर और स्थानीय माँग। आयात कर भाव में जुड़ा रहता है, और त्योहारों तथा शादी के मौसम में माँग बढ़ने से भाव और प्रीमियम थोड़ा ऊपर चले जाते हैं, भले ही धातु का दाम ख़ुद न बदला हो।
खरीदारों के लिए इसका मतलब
गहना खरीदने वालों के लिए असली बात यह है कि सिर्फ़ बताए गए भाव पर मत जाइए। 3 प्रतिशत जीएसटी और 8 से 25 प्रतिशत तक का मेकिंग चार्ज मिलाकर आपका असली खर्च बताए गए भाव से कहीं ज़्यादा हो जाता है, इसलिए अलग-अलग जौहरी के मेकिंग चार्ज की तुलना करना भाव की तुलना जितना ही ज़रूरी है। सिक्के और बिस्किट पर मेकिंग चार्ज बारीक डिज़ाइन वाले गहनों से कम होता है।
जो लोग सोने को सिर्फ़ निवेश के तौर पर रखना चाहते हैं, उनके लिए गहना सही नहीं है, क्योंकि उसमें मेकिंग चार्ज का नुक़सान होता है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की नई किश्त बंद होने के बाद अब गोल्ड ईटीएफ़ ही बिना मेकिंग चार्ज के सोने के दाम के साथ चलने का सबसे आसान तरीक़ा है, जैसा हमारी भारत में सोने में निवेश कैसे करें गाइड में बताया गया है।
आगे किन बातों पर नज़र रखें
सबसे पहले दुनिया भर के सोने के दाम पर नज़र रखें, क्योंकि यही भारत के भाव की दिशा तय करता है। तीसरे अमेरिकी विमानवाहक पोत की ख़बर पर तेल उछलने के बावजूद सोना लगभग नहीं हिला, इसलिए यह देखना ज़रूरी है कि क्या यह तनाव सच में किसी हमले में बदलता है, जो यह तय करेगा कि सोने का डर वाला प्रीमियम सच में सो गया है या बस रुका हुआ है।
दूसरी बात, रुपये पर ध्यान दें। रुपये में तेज़ हलचल से भारत का सोना दुनिया के दाम से अलग होकर भी ऊपर-नीचे हो सकता है, ख़ासकर जब रुपया फिर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर की तरफ़ बढ़ रहा हो।
तीसरी बात मौसम की है। शादी और त्योहारों के समय माँग बढ़ने से भाव नहीं, मेकिंग चार्ज और प्रीमियम ऊपर जाते हैं, इसलिए बड़ी खरीदारी इस भीड़ वाले समय से बाहर करने पर पैसे बच सकते हैं।
सोना आज भी भारतीय बचत का एक बड़ा हिस्सा है, और करीब 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर यह उसी हफ़्ते थोड़ा नरम रहा जब खाड़ी का तनाव फिर गहरा गया। चाँदी का ताज़ा भाव हमारे आज चाँदी का भाव पेज पर देखें। चाहे आप पहनने के लिए खरीदें या निवेश के लिए, सही भाव, कैरेट और ऊपर लगने वाले चार्ज की जानकारी ही एक अच्छे और महँगे सौदे के बीच का फ़र्क तय करती है।